एयर इंडिया का मालिक कोन हैं ? Information about of air india in hindi

एयर इंडिया एक एयरलाइंस कंपनी हैं।हवाई जहाज के बारे में हम सब जानते ही हैं।जब हम छोटे से तब हवाई जहाज को देखने को बहुत आतुर थे और आज भी।इसी तरह एयर इंडिया का नाम भी हमने बहुत बार सुना हैं। 

Information about of air india

आपके मनमे कई बार सवाल आया होगा कि एयर इंडिया की शरुआत किसने की थी।मालिक कोन हैं।तो हम इस लेख में एयर इंडिया का मालिक कोन हैं?ओर एयर इंडिया के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें आप लोगों के सामने हम सांझा करेंगे।तो लेख को पूरा पढ़े।तो चलिए शुरू करते हैं इस धमाकेदार लेख को…

एयर इंडिया की शरुआत किसने की थी 

एयर इंडिया की शरुआत सन् 1932 में मशहूर उद्योगपति जेआरडी टाटा ने की थी।जब उन्होंने इस कंपनी की स्थापना की थी तब उसका नाम टाटा एयरसर्विसेज था।टाटा एयरसर्विसेज के जहाज ने सबसे पहली उडान 15 अक्टूबर, 1932 को भरी थी।

जेआरडी टाटा

टाटा एयरलाइंस के बारे में

टाटा एयरसर्विसेज की शरुआत जेआरडी टाटा ने की थी। जेआरडी टाटा की अगुवाई में टाटा समूह ने भारत में प्रथम एयरलाइंस कंपनी शुरू की थी।

टाटा ही प्रथम एयरलाइंस कंपनी की उड़ान के पहले पायलट बने थे।टाटा के साथ उसके दोस्त नेविल विंसेंट भी जहाज को उड़ाया करते थे।जेआरडी टाटा को 10 फरवरी,1929 को पायलट का लाइसेंस मिला था।

यह उड़ान कराची से मद्रास की थी,जिसमें बम्बई में कुछ वक्त का स्टॉप था।टाटा एयरलाइंस के पास उस दौरान सिंगल इंजन हेवीलैंड वाले दो पस मोथ हवाई जहाज थे।पहली उडान में कराची से मद्रास तक जहाज में सवारियां नही,बल्कि 25 किलों चिट्ठियां भेजी गई थी।

दरअसल,चिट्ठियां लंदन से कराची तक ब्रिटन का राजसी विमान इंपीरियल एयरवेज द्वारा लायी जाती थी।

टाटा समूह के विमानन शाखा ने इंपीरियल एयरवेज से हवाई जहाज के दौरान चिट्ठियां ले जाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला था।वो चिट्ठियां लंदन से कराची तक इंपीरियल एयरवेज द्वारा आती थी और कराची से मद्रास तक टाटा एयरलाइंस द्वारा लाया जाता था। 

नियमित रूप से चिट्ठियां ले जाने का सिलसिला शुरू हुआ।तात्कालिक अंग्रेज सरकार ने टाटा को कोई आर्थिक मदद नहीं की थी।टाटा को हर चिट्ठी पर 4 आने दिए जाते थे।

टाटा को जब अहसास हुआ की वह एयरलाइंस का कारोबार अच्छे से संभाल सकते थे तब उन्होंने पहली पैसेंजर उड़ान छठ सीटों वाले माइल्स मर्लिन के साथ बॉम्बे से त्रिवेद्रम की शुरू की थी।

जब जेआरडी टाटा ने हवाई जहाज शुरू किया था तब उसका नाम टाटा एयरसर्विसेज था।बाद में उसका नाम टाटा एयरलाइंस कर दिया। 

टाटा एयरलाइंस की 2 लाख की लागत से शुरू की गई कंपनी ने पहले वर्ष में 1933 में 1,60,000 मिल (2,60,000 किलोमीटर) की उड़ान भरी थी।जिसमे 155 यात्री और 9.72 टन मेल थे और 60,000 (यूएसए $800) की आवक हुई।

टाटा एयरलाइंस का संचालन

टाटा एयरलाइंस का शरुआती दौर में संचालन मुंबई के जुहू के पास एक मिटी के मकान से होता था।वही मौजूद मैदान एक रन वे के रूप में इस्तमाल किया जाता था। 

जब बारिश आ जाती थी तब संचालन करना मुश्किल हो जाता था,क्यूंकि रन वे के लिए जिस मैदान का इस्तमाल किया जाता था,उस मैदान में बारिश की वजह पानी भर जाता था।इसलिए मोनसुन के सीजन में हवाई जहाज का संचालन पूना से किया जाता था। 

टाटा एयरलाइंस के पास उस समय दौरान एयरलाइंस का संचालन करने के लिए दो छोटे सिंगल इंजन वाले हवाई जहाज,दो पायलट और तीन मैकेनिक हुआ करते थे।

टाटा एयरलाइंस ने द्वितीय विश्व युद्ध 1939 से 1945 तक चले युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

टाटा एयरलाइंस कैसे बनी एयर इंडिया 

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत में वाणिज्य सेवा बहाल हो गई।आजादी के बाद भारत सरकार ने 1948 में टाटा एयरलाइंस में 49% भागीदारी अधिग्रहण कर ली।

1953 में भारत सरकार ने एक नया नियम लागू किया जो एयर कॉर्पोरेशन एक्ट था इस नियम के मुताबित भारत सरकार ने टाटा एयरलाइंस में बहुमत हिस्सेदारी खरीद ली।इस तरह से पूरी तरह टाटा एयरलाइंस भारत सरकार के कब्जे में आई गई और प्राइवेट कंपनी से सरकारी कंपनी बन गई।

फिर टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर विदेशी उडाने के लिए एयर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड नाम कर दिया और जो घरेलू उड़ाने भरती थी उसका नाम इंडियन एयरलाइंस कर दिया।

मोरारजी देसाई ने अचानक जेआरडी टाटा को 1 फरवरी,1978 को पद से हटाने का आदेश दिया।इस आदेश के साथ ही जेआरडी टाटा को इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के बोर्ड से हटा दिया।इस फैसले से इंदिरा गांधी ने दुख जताया था।

इस बात पर इंदिरा गांधी ने जेआरडी टाटा को खत लिखकर एयर इंडिया में उनकी भूमिका की तारीफ की थी।उस समय इंदिरा गांधी सत्ता में नहीं थी।जब इंदिरा गांधी 1980 में सत्ता में लौटी तब जेआरडी टाटा को इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया के बोर्ड में सामिल कर दिया लेकिन जेआरडी टाटा को चेयरमैन का पद नहीं मिल सका। 

भारत सरकार को एयर इंडिया क्यूं बेचनी पड़ी 

जब टाटा एयरलाइंस का राष्ट्रीयकरण हुआ तब से लेकर 2000 तक सरकारी कंपनी मुनाफे में रही।कंपनी को पहली बार 2001 में 57 हजार करोड़ का घाटा हुआ।ऐसा कहा जाता हैं,की 2005 में 111 विमानों को खरीदने का फैसला सरकार को भारी पडा।इस सौदे पर 70 हजार करोड़ रूपए खर्च हुए।इस एयरकार्फ्ट को चलाने के लिए कंपनी के पास कोई रणनीति नहीं थी।

साल 2007 में इंडियन एयरलाइंस को एयर इंडिया में विलय कर दिया।विलय किया उस वक्त कंपनी पर सयुक्त घाटा 771 करोड़ रुपए का था।उम्मीद की जा रही थी यह घाटा जल्द ही फायदे में हो जायेगा।लेकिन धीरे धीरे यह कंपनी घाटे में ही जाने लगी और मुनाफा ही नहीं हुआ। 

कंपनी पर चलते घाटे के लिए सरकार ने 2017 को एयर इंडिया को निजीकरण की मंजूरी दे दी।2018 में कंपनी की 76% हिस्सेदारी बेचनी के लिए बोली मंगवाई।किंतु,सरकार ने एक शर्त रखी थी की,जो कोई कंपनी एयर इंडिया की 76% हिस्सेदारी खरीद लेगा,लेकिन इसका कंट्रोल सरकार के पास रहेंगा।इसी वजह से कोई कंपनी बोली के लिए तैयार न हुई। 

इसके बाद सरकार ने 2020 में कंपनी की 100% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया।कंपनी को खरीदने के लिए 15 सितंबर, 2021 में टाटा ग्रुप और स्पाइजेट ने बोली लगाई थी।जिसमे टाटा ग्रुप ने 18000 हजार करोड़ रुपए की अधिक बोली लगाकर एयर इंडिया को वापिस खरीद लिया।

एयर इंडिया का लोगो

एयर इंडिया का लोगो लाल रंग का उड़ता हुआ हंस हैं। इसमें नारंगी रंग में कोणार्क चक्र दिखाई देता हैं।लोगो की जगह प्लेन के पिछले हिस्से पर दी जाती हैं।

FAQ :- 

1. एयर इंडिया की शरुआत किसने की थी?

☞ जेआरडी टाटा ने                         

2. एयर इंडिया की शरुआत कब की थी?  

☞ वर्ष 1932 में 

3. जब एयर इंडिया की शरुआत हुई थी तब उसका नाम क्या था?

☞ टाटा एयरलाइंस (टाटा एयरसर्विसेज)

4. एयर इंडिया का मुख्यालय कहाँ हैं ?

☞ नई दिल्ली                     

5. जेआरडी टाटा को हर चिट्ठी पर कितने आने दिए जाते थे?

☞ 4 आने 

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